कांग्रेस राजनीति को व्यक्तिगत विद्वेष तक ले जाने का काम कर रही है: मुख्यमंत्री

Madhya Pradesh News

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हर एक राजनीतिक दल को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है। लेकिन 14 साल सत्ता से बाहर रहने के कारण कांग्रेस के नेता लोकतंात्रिक मर्यादाएं और परंपराओं को भूल चुके हैं। कोई दल जब राजनीतिक यात्रा पर निकला है और विपक्ष यह योजना करे कि हर जगह उस यात्रा में गड़बड़ी हो, काले झंडे दिखाए जाए, यात्रा में व्यवधान हो मध्यप्रदेश के राजनीतिक इतिहास में ऐसा कभी नहीं

हुआ। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस द्वारा राजनीति को व्यक्तिगत विद्वेष तक ले जाने का काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने यह बात गुरूवार को बालाघाट में पत्रकार बंधुओं से चर्चा करते हुए कही। मुख्यमंत्री के साथ पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री प्रभात झा, सांसद श्री बोधसिंह भगत, वरिष्ठ मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन, प्रदेश सहमीडिया प्रभारी श्री सर्वेश तिवारी उपस्थित थे। उन्होंने कांग्रेस द्वारा किए जा रहे अलोकतांत्रिक आचरण की निंदा करते हुए कहा कि

राजनीति में शालिनता से बात करने की परंपरा रही है विपक्ष को मैदान में मुकाबला करने का अधिकार है, लेकिन पिछले दिनों कांग्रेस नेताओं द्वारा कुछ ऐसे शब्दों का उपयोग किया जा रहा है जो कि निंदनीय है। कभी मुझे वैश्या तो कभी जनरल डायर और कभी नालायक तक कांग्रेस कहा गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा कमर से नीचे वार और गड़बड़ करने की कोशिश की जा रही है, यह लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से बात रखती है, हमारी दृष्टि हमेशा विकास और प्रदेश को आगे बढ़ाने की रही है। सामाजिक, आर्थिक विकास में हम विश्वास करते हैं लेकिन कांग्रेस का यह आचरण लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है।

राहुल गांधी सकारात्मक बात रखने में नाकाम रहे
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राहुल गांधी भोपाल आए, मुझे उम्मीद थी कि वे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को राजनीतिक दिशा देंगे और गंभीर बात करेंगे लेकिन संसद में जो किया था वैसी चीजें उन्होंने भोपाल में भी दोहराईं। सचमुच एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के अध्यक्ष की इस तरह बाॅडी लेंग्वेज जिसमें वह आॅखांे की भाषा बोलते हैं, शोभा नहीं देती। जनता में सकारात्मक बात रखने में राहुल गांधी नाकाम रहे।

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