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ई-संजीवनी ने 50 करोड़ टेलीकंसल्टेशन का आंकड़ा पार किया

ई-संजीवनी ने 50 करोड़ टेलीकंसल्टेशन का आंकड़ा पार किया
esanjeevniई-संजीवनी ने 50 करोड़ टेलीकंसल्टेशन का आंकड़ा पार किया
राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा ई-संजीवनी ने 50 करोड़ टेली-परामर्श का आंकड़ा पार कर लिया है। यह देश में डिजिटल तकनीक के जरिए लोगों तक किफायती, सुलभ और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के सरकार के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अब तक 50 करोड़ से अधिक टेली-परामर्श किए जा चुके हैं।

मंत्रालय के अनुसार, यह उपलब्धि स्वास्थ्य सेवाओं में टेलीमेडिसिन की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। इससे खास तौर पर ग्रामीण, दूरदराज और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों के लोगों तक इलाज की सुविधा पहुंचाने में मदद मिल रही है।

ई-संजीवनी देश के डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। इसे प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में दुनिया की सबसे बड़ी टेलीमेडिसिन व्यवस्था माना जाता है। इसके जरिए लोगों को अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचे बिना अपने आसपास से ही डॉक्टरों से परामर्श की सुविधा मिल रही है।

ई-संजीवनी के अंतर्गत इस समय एक लाख 42 हजार से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 19 हजार से अधिक मेडिकल हब और 901 ऑनलाइन ओपीडी काम कर रहे हैं। इस प्लेटफॉर्म से दो लाख से अधिक स्वास्थ्यकर्मी जुड़े हैं। इसके जरिए रोजाना करीब ढाई से तीन लाख परामर्श 15 भाषाओं में दिए जा रहे हैं। इनमें अंग्रेजी और 14 भारतीय भाषाएं शामिल हैं। एक दिन में सबसे अधिक छह लाख से ज्यादा टेली-परामर्श दर्ज किए गए हैं।

ई-संजीवनी की कुल सेवाओं में 57% से अधिक का इस्तेमाल महिलाएं कर रही हैं। वहीं, करीब 40% परामर्श 46 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों ने लिए हैं। इनमें 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों की हिस्सेदारी 16.25% है।

ई-संजीवनी में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम भी जोड़ा गया है। यह डॉक्टरों को मरीजों के इलाज के दौरान बेहतर निर्णय लेने में सहायता करता है। इस नवाचार को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में गोल्ड अवॉर्ड भी मिला है। ई-संजीवनी को आपातकालीन सहायता सेवा-112 से भी जोड़ा गया है। इससे आपात स्थिति में लोगों को दूर से विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

अब ई-संजीवनी के जरिए प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में विशेषज्ञ डॉक्टरों से ऑनलाइन ओपीडी परामर्श की सुविधा भी बढ़ाई जा रही है। चुनिंदा विशेषज्ञ सेवाएं एम्स जोधपुर, एम्स जम्मू और एम्स पटना में शुरू की गई हैं। ई-संजीवनी भारत में विकसित डिजिटल स्वास्थ्य सेवा है। इसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग-सीडैक ने विकसित किया है।
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aum

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