शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित हेल्पलाइन नंबर अनिवार्य रूप से करें प्रदर्शित : एसीएस उच्च शिक्षा राजन
mentalhealth,mentalhealthhelplinenumber,mentalhealthhelplinenumberineducationinstitute,madhyapradeshnews,bhopalशैक्षणिक संस्थान माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का अनिवार्य रूप से करें पालन
विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में हुआ जागरूकता सेमिनार का आयोजन
सेमिनार में विभिन्न हितधारक विभागों के अधिकारी व शासकीय, निजी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों के कुलसचिव, प्राचार्य हुए शामिल
भोपाल : शुक्रवार, जनवरी 30, 2026
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश एवं राष्ट्रीय कार्यबल के अनुक्रम में शुक्रवार को अपर मुख्य सचिव श्री अनुपम राजन की अध्यक्षता में उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की आत्महत्या की रोकथाम एवं मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। यह सेमिनार E-211, वल्लभ भवन-3, भोपाल में हुआ। सेमिनार में भोपाल जिले के शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के कुलसचिव, प्राचार्य एवं स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा, महिला बाल विकास, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण, नगरीय प्रशासन, मप्र निजी विश्वविद़यालय विनियामक आयोग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य विभाग, संचालक राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान, सीहोर, पुलिस विभाग और जनसंपर्क विभाग सहित हितधारक विभागों अधिकारी प्रतिनिधिगण शामिल हुए।
सेमिनार के दौरान अपर मुख्य सचिव श्री राजन ने कहा कि सभी शैक्षणिक संस्थान माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करें। उन्होंने सेमिनार में उपस्थित अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों को उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या की रोकथाम के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों की जानकारी दी तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की।
सभी शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित किए जाएं
अपर मुख्य सचिव श्री राजन ने निर्देश दिए कि सभी शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित हेल्पलाइन नंबर टेली मानस 14416, उमंग हेल्पलाइन 14425 एवं आपातकालीन नंबर 112 को अनिवार्य रूप से परिसर की दीवारों पर प्रदर्शित किया जाए, जिससे विद्यार्थियों को समय पर सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समय-समय पर जागरूकता संबंधी गतिविधियों का नियमित रूप से आयोजन किया जाए, ताकि छात्र-छात्राओं को आवश्यक जानकारी एवं सहयोग समय पर प्राप्त हो सके। किसी भी छात्र की आत्महत्या अथवा अप्राकृतिक मृत्यु की सूचना मिलते ही संबंधित शैक्षणिक संस्थान द्वारा तत्काल पुलिस को जानकारी देना अनिवार्य होगा, चाहे घटना संस्थान परिसर के भीतर हुई हो या बाहर। साथ ही, ऐसी घटनाओं की वार्षिक रिपोर्ट विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एवं संबंधित नियामक संस्थाओं को भी प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।
आवासीय शैक्षणिक संस्थानों में 24×7 आपातकालीन चिकित्सा सुविधा हो उपलब्ध
आवासीय शैक्षणिक संस्थानों में 24×7 आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए अथवा निकटतम एक किलोमीटर की परिधि में ऐसी सुविधा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने लंबे समय से रिक्त शिक्षण एवं गैर-शिक्षण पदों को चार माह की अवधि में भरने तथा आरक्षित वर्गों के पदों को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए हैं। अपर मुख्य सचिव श्री राजन ने कहा कि छात्रों की सभी लंबित छात्रवृत्तियों का समयबद्ध निराकरण किया जाए। छात्रवृत्ति में विलंब के कारण किसी भी छात्र को परीक्षा, कक्षा, हॉस्टल अथवा डिग्री/मार्कशीट से वंचित नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, शैक्षणिक संस्थानों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सभी बाध्यकारी विनियमों, विशेषकर रैगिंग निरोधक व्यवस्था, समान अवसर प्रकोष्ठ, आंतरिक शिकायत समिति एवं छात्र शिकायत निवारण तंत्र के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए।
प्रत्येक शैक्षणिक संस्थाओं में गठित किया जाए विशेष सेल
अपर मुख्य सचिव श्री राजन ने कहा कि विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सभी शैक्षणिक संस्थाओं में काउंसलर की नियुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य से पीड़ित विद्यार्थियों की समय पर पहचान के लिए प्रत्येक संस्थान में विशेष सेल का भी गठन किया जाए। इसके साथ ही जिला एवं संभाग स्तर पर विद्यार्थियों, फैकल्टी सदस्यों एवं अभिभावकों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए भी नियमित कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
कोचिंग संस्थानों का अनिवार्य पंजीयन
अपर मुख्य सचिव श्री राजन ने कहा कि किसी भी जिले में बिना पंजीयन के कोई भी कोचिंग संस्था संचालित न हो, यह सुनिश्चित किया जाए। जिला स्तर पर निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में जिला स्तर की निगरानी समिति का गठन भी किया गया है। सेमिनार के दौरान मानसिक स्वास्थ्य एवं जागरूकता के संबंध में विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें विषय विशेषज्ञों द्वारा मानसिक स्वास्थ्य से ग्रसित बच्चों में लक्षण की पहचान और बचाव के बारे में जानकारी दी गई।
आयुक्त उच्च शिक्षा श्री प्रबल सिपाहा ने कहा कि सभी प्रकार के शासकीय, अशासकीय शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा विद्यार्थियों के आत्महत्या के प्रयास को रोका जाना है। विद्यार्थी ऐसा कदम नहीं उठाएं इसके लिए गंभीरता से प्रयास किए जाएं।
एमएलबी कन्या महाविद्यालय भोपाल की मनोविज्ञान विभाग की प्रोफेसर डॉ. अनिता पुरी ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों में मानसिक तनाव के प्रारंभिक लक्षणों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। विद्यार्थियों की बातों को सहानुभूतिपूर्वक सुनना चाहिए, जिससे वे अपनी समस्याएं खुलकर साझा कर सकें। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र के जीवन में शिक्षक ही उसका पहला काउंसलर होता है, जो सही मार्गदर्शन देकर उसे मानसिक रूप से सशक्त बना सकता है। बच्चों के साथ नियमित रूप से 45 मिनट का समय जरूर बिताएं। बच्चों के खेलकूद, पीटी, डांस, गीत-संगीत जैसी गतिविधियों में शामिल होने से तनाव कम होता है।
क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. सुमित राय ने कहा कि विद्यार्थियों में समस्या को फेस करने एवं समाधान खोजने की क्षमता विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चों पर सफलता का दबाव बनाना सबसे बड़ी गलती होती है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए हर कार्य को चरणबद्ध तरीके से करना चाहिए। प्रत्येक चरण में चुनौतियां आती हैं, लेकिन उन्हीं से सीखकर सफलता प्राप्त की जा सकती है। डॉ. राय ने कहा कि जिन बच्चों को हम भारत देश सौंपेंगे उनको मजबूत बनाना होगा। वहीं क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. काकोली राय ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने वातावरण के प्रति जागरूक होना चाहिए तथा हाई रिस्क इंडिकेटर्स को समझना आवश्यक है। बच्चों को अपनी मन की बात खुलकर कहने का अवसर दिया जाना चाहिए। साथ ही उनकी दिनचर्या पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि समय रहते मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को समझाकर दूर किया जा सके। शासकीय एमएलबी कॉलेज इंदौर के साइकोलॉजिस्ट सहायक प्रोफेसर डॉ. अमित सोनी ने मानसिक स्वास्थ्य से ग्रासित बच्चों में पहचान के लक्षण व रोकथाम के लिए किए जाने वाले प्रयासों के बारे में जानकारी दी। विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में काम करने वाली संस्था योरदोस्त की सीईओ सुश्री रिचा सिंह ने कहा कि हम सभी को मिलकर विद्यार्थियों के स्वास्थ्य एवं खुशहाल भारत की दिशा में काम करना होगा।
सेमिनार में उपस्थित शासकीय एवं निजी महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों एवं प्राचार्यों ने विद्यार्थियों की आत्महत्या की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों को लेकर अपने-अपने सुझाव भी प्रस्तुत किए।
नेशनल टास्क फोर्स (NTF) के निर्देशों के पश्चात उच्च शिक्षा विभाग द्वारा स्टेट टास्क फोर्स (STF) का गठन किया गया है। यह टास्क फोर्स विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श सेवाओं एवं रोकथाम उपायों से संबंधित नीतिगत हस्तक्षेपों के लिए योजना एवं दिशा-निर्देश जारी कर रही है। एनटीएफ नेशनल टास्क फोर्स द्वारा प्रत्येक राज्य के साथ समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नामित किया गया है। म.प्र. के नोडल अधिकारी आयुक्त उच्च शिक्षा श्री प्रबल सिपाहा हैं। इसके साथ ही राज्य के कार्यों का सुचारू रूप से संचालन के लिए एसटीएफ का गठन किया गया है, जिसके अध्यक्ष आयुक्त, उच्च शिक्षा हैं। ओएसडी डॉ. उषा के. नायर को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। इसमें स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, बाल संरक्षण, सामाजिक न्याय एवं नगरीय प्रशासन विभागों के प्रतिनिधि शामिल हैं। यह एक बहु-विभागीय तंत्र है जो विद्यार्थियों की चुनौतियों को व्यापक दृष्टि से देखेगा।
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