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राज्यसभा ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया

राज्यसभा ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया
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राज्यसभा ने राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया है। यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में और संशोधन करेगा। प्रस्तावित विधेयक वंदे मातरम को राष्ट्रीय गान जन गण मन के समान वैधानिक संरक्षण प्रदान करेगा। इन अपराधों के लिए तीन वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।

विधेयक पर हुई चर्चा का उत्तर देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि विधेयक में संशोधन केवल एक विधायी परिवर्तन नहीं है। उन्होंने कहा कि यह भारत की आत्मा, राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। गृह राज्य मंत्री ने कहा कि 1971 में राष्ट्रीय गौरव के अपमान की रोकथाम अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान जन गण मन के प्रति सम्मान सुनिश्चित करने के प्रावधान किए गए थे। श्री राय ने कहा कि वंदे मातरम का जानबूझकर अपमान करना मौजूदा कानून के तहत दंडनीय होगा। राष्ट्र गीत वंदे मातरम की रचना 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी।

गृह राज्य मंत्री ने दावा किया कि 1935 में जब जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस के अध्यक्ष बने, तो उन्होंने वंदे मातरम को केवल दो छंदों तक सीमित कर दिया था। दूसरी ओर, 1928 में जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस कांग्रेस अध्यक्ष थे, तो उन्होंने तिमीर बरन बनर्जी से इस गीत का एक पूर्ण और गरिमापूर्ण संगीत संस्करण तैयार करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 को सरदार वल्लभभाई पटेल ने पंडित ओंकारनाथ ठाकुर से सुबह साढ़े 6 बजे ऑल इंडिया रेडियो पर पूर्ण वंदे मातरम का गायन करने का अनुरोध किया था, जो पहले स्वतंत्रता दिवस का प्रतीक था।

श्री राय ने कहा कि 24 जनवरी 1950 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान सभा में कहा था कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक महत्व रखने वाले वंदे मातरम को जन गण मन के समान सम्मान दिया जाएगा। श्री राय ने कहा कि वंदे मातरम का विरोध तुष्टीकरण की नीति को दर्शाता है जो राष्ट्र के गौरव को ठेस पहुंचाता है।

इससे पहले, चर्चा की शुरुआत करते हुए भाजपा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा कि पिछले 123 वर्षों से वंदे मातरम गीत का अपमान किया गया है। उन्होंने कहा कि इस गीत से प्रेरित होकर देश के क्रांतिकारियों ने राष्ट्र के लिए बलिदान दिए। श्री अग्रवाल ने आरोप लगाया कि 1923 में कांग्रेस के अधिवेशन के दौरान तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष ने वंदे मातरम का अपमान किया था।

वाईएसआरसीपी के गोल्ला बाबूराव ने सदन के सभी सदस्यों से राष्ट्र गीत का सम्मान करने का अनुरोध किया। उन्होंने इस विधेयक को पेश करने के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। श्री बाबूराव ने कहा कि वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत है जिसने अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों को देश के लिए प्राणों का बलिदान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इस गीत से उत्पन्न भावना ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस चर्चा में बीजेडी की सुलता देव, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, एआईएडीएमके के डॉ. एम. थंबीदुरई और अन्य सदस्य उपस्थित थे।

विधेयक पारित होने के बाद राज्यसभा में विशेष उल्लेख सत्र हुआ, जिसमें सदस्यों ने अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। इसके बाद राज्यसभा को कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
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aum

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