देशभर में आज गुरु पूर्णिमा मनाई जा रही है; उपराष्ट्रपति, पीएम मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुभकामनाएं दीं
#GuruPurnimaदेशभर में आज गुरु पूर्णिमा मनाई जा रही है; उपराष्ट्रपति, पीएम मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुभकामनाएं दीं
आध्यात्मिक और शैक्षणिक गुरुओं को समर्पित आज गुरु पूर्णिमा मनाई जा रही है, जिसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस अवसर पर लोग अपने गुरुओं को याद करते हैं और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद इसी अवसर पर अपना पहला उपदेश दिया था। भगवान बुद्ध बोधगया से सारनाथ की यात्रा पर गए थे और पूर्णिमा के दिन अपना उपदेश दिया था। इसलिए, बुद्ध के अनुयायी इस दिन उनकी पूजा करते हैं।
उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर जनता को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। सोशल मीडिया पोस्ट में उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु मार्गदर्शक होते हैं जो ज्ञान, मूल्यों और सही आचरण का संचार करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु न केवल शिक्षा देते हैं बल्कि लोगों को सत्य, कर्तव्य और सेवा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित भी करते हैं। श्री राधाकृष्णन ने कहा कि माता-पिता, शिक्षक और वे सभी जो व्यक्तियों को बेहतर इंसान बनने की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं, गुरुओं के समान ही सम्मान के पात्र हैं। उन्होंने जनता से गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करने और ज्ञान, चरित्र, विनम्रता और सेवा भाव के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में स्वयं को समर्पित करने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में मोदी ने कहा कि गुरु केवल ज्ञान प्रदान ही नहीं करते, बल्कि अपने शिष्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और उन्हें नेक विचारों और सद्गुणों से परिपूर्ण बनाते हैं। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने आदर्शों को अपने जीवन की शक्ति का स्रोत बनाएं।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शुभकामनाएं दी हैं। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में श्री बिरला ने कहा कि गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में विद्यमान उस शाश्वत चेतना का उत्सव है, जिसने सदियों से ज्ञान, मूल्यों, सत्य और मानवता के प्रकाश से समाज का मार्गदर्शन किया है।
लोकसभा अध्यक्ष ने इस बात पर बल दिया कि हमारी गौरवशाली परंपरा में गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा स्थान दिया गया है, क्योंकि गुरु ही अज्ञान के अंधकार को दूर करते हैं और ज्ञान का दीप प्रज्वलित करते हैं।
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