विक्रम लैंडर करोड़ों भारतीयों की तरफ से विक्रम साराभाई(vikram sarabhai) को श्रद्धांजलि के रूप में चंद्रमा पर उतरेंगे: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(narendra modi)

डॉ. विक्रम साराभाई(vikram sarabhai) द्वारा स्थापित संस्थान आज उत्कृष्टता के केंद्र बन गए हैं: डॉ. के. सिवन
डॉ. विक्रम साराभाई शताब्दी समारोह का आज अहमदाबाद में उद्घाटन हुआ
इसरो के संस्थापक जनक डॉ. विक्रम साराभाई(vikram sarabhai) की जयंती का शताब्दी समारोह आज अहमदाबाद में इसरो, अंतरिक्ष विभाग, परमाणु ऊर्जा विभाग के अधिकारियों और साराभाई परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में आरंभ हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(narendra modi) ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से सभा को संबोधित किया।

श्री नरेंद्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि यह डॉ. साराभाई को सही अर्थों में करोड़ों भारतीयों की ओर से श्रद्धांजलि होगी जब ‘विक्रम’ लैंडर चंद्रमा पर उतरेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विक्रम साराभाई की विचारधारा भारत को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक शक्तिशाली देश बनने की दिशा में ले जाती है। श्री मोदी ने कहा कि डॉ. होमी भाभा के निधन से भारतीय विज्ञान की दुनिया में एक शून्य पैदा हो गया था। उस समय, विक्रम साराभाई ने अपने कौशल और नेतृत्व क्षमता के साथ विज्ञान को एक नया आयाम दिया।

श्री मोदी ने डॉ. विक्रम साराभाई को विज्ञान के एक समर्पित योद्धा के रूप में बताते हुए कहा कि उन्होंने विज्ञान के साथ-साथ भारत की संस्कृति और संस्कृत भाषा को भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने हमेशा छात्रों के लिए समय दिया। श्री मोदी ने कहा कि डॉ. विक्रम साराभाई हमारे लिए एक विरासत छोड़ गए और इस विरासत को लोगों तक ले जाना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने स्कूली बच्चों को इसरो द्वारा शुरू किए गए ऑनलाइन स्पेस क्विज में भाग लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

इसरो के अध्यक्ष डॉ. के. सिवन ने डॉ. विक्रम साराभाई को एक महान संस्थान निर्माता करार दिया। उन्होंने कहा कि विक्रम साराभाई ने आधुनिक विज्ञान, भौतिक अनुसंधान और परमाणु ऊर्जा इत्यादि क्षेत्रों में संस्थानों की स्थापना के जरिए आधुनिक भारत के निर्माण में बहुत बड़ा योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि विक्रम साराभाई द्वारा स्थापित संस्थान आज उत्कृष्टता के केंद्र बन गए हैं। उन्होंने कहा कि इस अर्थ में डॉ. विक्रम साराभाई भारत के सच्चे पुत्र हैं।

उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान, डॉ. विक्रम साराभाई की जीवन गाथा पर एक एलबम, इसरो पर एक कॉफी टेबल बुक और परमाणु ऊर्जा विभाग से स्मारक सिक्का जारी किया गया। इस अवसर पर एक बस के भीतर ‘स्पेस ऑन व्हील्स’ एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया गया।

साल भर तक चलने वाले डॉ. विक्रम साराभाई शताब्दी कार्यक्रम में प्रदर्शनियां, स्कूली बच्चों के लिए प्रतियोगिताएं, पत्रकारिता पुरस्कार और विख्यात व्यक्तियों द्वारा व्याख्यान शामिल हैं। यह कार्यक्रम आज से शुरू होकर पूरे भारत के 100 चयनित शहरों में आयोजित किया जाएगा और 12 अगस्त, 2020 को तिरुवनंतपुरम में समापन समारोह के साथ सम्पन्न हो जाएगा।

इस अवसर पर विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के पूर्व निदेशक डॉ. बी. एन. सुरेश, अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के पूर्व निदेशक और डॉ. साराभाई श्री प्रमोद काले के करीबी सहयोगी, इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. कस्तूरीरंगन, परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष श्री के. एन. व्यास, परमाणु ऊर्जा विभाग के पूर्व अध्यक्ष श्री एम. आर. श्रीनिवासन और डॉ. विक्रम साराभाई के पुत्र डॉ. कार्तिकेय साराभाई भी उपस्थित थे।

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भारतीय वैज्ञानिक विक्रम साराभाई(vikram sarabhai) की आज 100वीं जंयती है।
भारतीय वैज्ञानिक विक्रम साराभाई की आज 100वीं जंयती है। 12 अगस्त 1919 को अहमदाबाद में जन्में विक्रम साराभाई ने भारत को अंतरिक्ष तक पहुंचाया। उनके पिता अंबालाल साराभाई एक संपन्न उद्योगपति थे तथा गुजरात में कई मिलों के स्वामी थे | विक्रम साराभाई की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के तहत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना थी |(vikram sarabhai)(Vikram Sarabhai 100th Birth Anniversary)(ISRO)(todayindia)(latest news)(breaking news)(national news)(bollywood news)(cricket news)(sports news)(political news)
उनको भारत के स्पेस प्रोग्राम का जनक माना जाता है। सर्च इंजन गूगल ने अपना डूडल भारतीय वैज्ञानिक विक्रम साराभाई को समर्पित किया है | विक्रम साराभाई को 1962 में शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है | उन्हें 1966 में पद्म भूषण और 1972 में पद्म विभूषण (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया था |
डॉ. विक्रम साराभाई की याद में अंतरराष्ट्रीय खगोल संघ ने वर्ष 1974 में अंतरिक्ष में ‘सी ऑफ सेरनिटी’ पर स्थित बेसल नाम के मून क्रेटर को साराभाई क्रेटर नाम दिया था. इसरो ने भी चंद्रयान-दो के लैंडर का नाम विक्रम रखकर उन्हें याद किया.(vikram sarabhai)(Vikram Sarabhai 100th Birth Anniversary)(ISRO)(todayindia)(latest news)(breaking news)(national news)(bollywood news)(cricket news)(sports news)(political news)

डॉ. विक्रम साराभाई (Vikram Sarabhai) द्वारा स्थापित जाने माने कुछ संस्थान हैं:

-भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल), अहमदाबाद
-भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), अहमदाबाद
-कम्यूनिटी साइंस सेंटर, अहमदाबाद
-कला प्रदर्शन के लिए दर्पण अकादमी, अहमदाबाद (अपनी पत्नी के साथ)
-विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम
-अंतरिक्ष उपयोग केंद्र, अहमदाबाद (साराभाई द्वारा स्थापित छह संस्थानों/ केन्द्रों के विलय के बाद यह संस्था अस्तित्व में आई)
-फास्टर ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (एफबीटीआर), कलपक्कम
-परिवर्ती ऊर्जा साइक्लोट्रॉन परियोजना, कलकत्ता
-भारतीय इलेक्ट्रॉनकी निगम लिमिटेड (ईसीआईएल), हैदराबाद
-भारतीय यूरेनियम निगम लिमिटेड (यूसीआईएल), जादुगुडा, बिहार
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