भोपाल गैस त्रासदी के दुष्प्रभाव का असर ३४ साल बाद भी दिखाई दे रहा है |

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भोपाल में २-३ दिसंबर १९८४ की मध्य रात्रि जो जहरीले जख्म गैस त्रासदी से लाखो लोगो को मिले वह आज भी हरे
हैं | हाल हे मैं तैयार की गयी सम्भावना ट्रस्ट की रिपोर्ट भी चौकाने वाली हैं | रिपोर्ट में बताया गया की हर साल आम लोगो की अपेक्षा गैस पीड़ितों की बीमारियों के कारन मौत का आकंड़ा २८ प्रतिशत ज्यादा हैं | रिपोर्ट में यह भी बताया गया हैं की सामान्य लोगो को अपेक्षा गैस पीड़ित लोगो में ६३ प्रतिशत अधिक बीमारियां हैं |

गैस पीड़ित आम लोगो की तुलना में ६० प्रतिशत अधिक बीमार हो रहे है |
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बिमारिओं से हर साल आम लोगो की तुलना में गैस पीड़ितों की २८ प्रतिशत ज्यादा मौत होती है |सम्भावना ट्रस्ट के द्वारा कराये गए शोध के आधार पर यह बात भोपाल ग्रुप फॉर एक्शन एन्ड इनफार्मेशन के सतीनाथ सरंगी ने शनिवार को भोपाल में मीडिया से कही | २००२ में शोध शुरू किया था | शोध में सामने आया की सामान्य लोगो की तुलना में गैस पीड़ित ६० परसेंट ज्यादा बीमार होते है | इन लोगो को सांस,सीने में दर्द,चक्कर,जैसे समस्याएं है| आम लोगो की तुलना में दोगुने गैस पीड़ित कैंसर टीबी जैसे बिमारिओं से जूझ रहे है|


३४ साल बाद आज भी यूनियन कार्बाइड का कारखाना रोज आसपास की ४२ बस्तियों में जहर घोल रहा हैं |इसका कारण यह हैं की सालो तक इस कारखाने से निकला कचरा, जिसे कंपनी ने कारखाने की जमीन के नीचे दबाया और यह जहर रिसकर आसपास की 42 बस्तियों तक पहुँच गया हैं | इस जहरीले कचरे को जमीन के अंदर दबाने की प्रक्रिया १९६९ में यूनियन कार्बाइड के कारखाने के प्रारम्भ से चल रही हैं | यह कचरा कारखाने के गोडाउन में बहार पड़े ३४० मेट्रिक टन कचरे से ज्यादा खतरनाक हैं | यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में रखे ३४० मेट्रिक टन जहरीले कचरे का निस्तारण बरसो से अटका है | पैक रखे इस कचरे में से १० टन पीथमपुर ले जाय गया था | पर इसके बाद मामला ठन्डे बस्ते में है | गैस पीड़ित संघटनो से लेकर पर्यावरण के लिए काम कर रही संस्थाए इस मामले में अपनी रिपोर्ट दे चुकी है | सुनवाई नहीं हो रही है |
१० से ज्यादा संस्थाएं कर चुकी हैं भू – जल परिक्षण


गैस पीड़ितों के उपचार एवं पुनर्वास में केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन भी नहीं किया हैं | सुप्रीम कोर्ट ने गैस पीड़ितों के संघठनो की याचिका पर अगस्त २०१२ में BMHRC को
पीजी इंस्टिट्यूट बनाने , अस्पतालों में डॉक्टर की कमी दूर करने , गैस प्रभावित कॉलोनियों में साफ पानी देने और भूमिगत जल में जहरीले तत्व मिलने की जांच करने को कहा था | साथ ही अन्य समस्याओ के लिए हाई कोर्ट जाने को कहा था | संघठनो की याचिका पर हाईकोर्ट ने भी BMHRC  में विशेषज्ञ डॉक्टर्स के भर्ती सहित कई निर्देश दिए पर उनका पालन नहीं हुआ |
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