अपने पुरुषार्थ और परिश्रम से, स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक पुनः विश्वगुरु बनेगा भारत : मंत्री परमार
vishvguru,indersinghparmar,madhyapradeshnewsअतीत के संघर्षों, बलिदानों और महापुरुषों के योगदान से सीख लेकर आगे बढ़ना होगा
वर्ष 2047 तक ऊर्जा एवं खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर एवं अन्य देशों की पूर्ति करने में सामर्थ्यवान होगा भारत
एमसीयू में अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ
भोपाल : शुक्रवार, जनवरी 30, 2026
उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परम्परा अत्यंत गौरवशाली रही है। ज्ञानमेव शक्ति, भारत का दृष्टिकोण है, इसे पुनः विश्वमंच पर स्थापित करना होगा। भारतीय शिक्षा के दर्शन को सही परिप्रेक्ष्य में समझने की आवश्यकता है। शिक्षा, देश की रीढ़ होती है, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने हमें पुनः भारतीय दृष्टि से देश के प्रश्नों के समाधान करने वाले श्रेष्ठ नागरिक निर्माण करने महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है। देश में पहली बार, भारत केंद्रित शिक्षा के स्वर गुंजायमान हो रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को विश्वमंच पर सिरमौर बनाने का राष्ट्रीय संकल्प आगे बढ़ रहा है। हमें अतीत के संघर्षों, बलिदानों और महापुरुषों के योगदान से सीख लेकर आगे बढ़ना होगा, तभी भारत पुनः विश्वगुरु बन सकेगा। अपने परिश्रम और पुरुषार्थ के बल पर भारत पुनः विश्वमंच पर सिरमौर बनेगा।
मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार, शुक्रवार को भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के गणेश शंकर विद्यार्थी सभागार में, अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE Survey) 2025-26 के प्रभावी एवं सफल क्रियान्वयन के परिप्रेक्ष्य में आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। मंत्री श्री परमार ने कहा कि आने वाला समय डाटा का है और इस सर्वेक्षण में विभिन्न संस्थानों में विद्यार्थियों का सुव्यवस्थित डाटा एकत्र कर, प्रदेश को देश भर में अग्रणी बनाने के लिए परिश्रम करने की आवश्यकता है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारत केंद्रित है और भारतीय दर्शन, मूल्यों तथा वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को सशक्त रूप से प्रस्तुत करती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन में प्रदेश अग्रणी है, इसके परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परम्परा पर व्यापक क्रियान्वयन हो रहा है। मंत्री श्री परमार ने बताया कि उच्च शिक्षा में प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परम्परा का समावेश किया गया है।
मंत्री श्री परमार ने कहा कि विकसित भारत 2047 का संकल्प, शिक्षा के मंदिरों को पुनः विश्व के सर्वोच्च ज्ञान के केंद्र बनाने का संकल्प है। शिक्षा के मंदिरों से, वसुधैव कुटुंबकम् का भाव मजबूत होगा। मंत्री श्री परमार ने कहा कि प्राचीन ऐतिहासिक तथ्यों, धरोहरों और परंपराओं को वर्तमान ज्ञान से जोड़कर आगे बढ़ने वाले मीडिया संस्थान जैसे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विश्वविद्यालय द्वारा सौ वर्षों की धरोहरों पर आधारित समाचार पत्रों की ऐतिहासिक सुर्खियों का संरक्षण एक सराहनीय और अनुकरणीय कार्य है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देने वाले महापुरुषों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करने और उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
पुण्यतिथि के अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी को नमन करते हुए मंत्री श्री परमार ने कहा कि दोनों विभूतियों का राष्ट्र को जागृत करने में अतुलनीय योगदान रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें देश की समस्याओं का समाधान, देश के भीतर ही खोजते हुए भारत को आत्मनिर्भर बनाना है।
मंत्री श्री परमार ने प्रदेश में शिक्षा के साथ सड़क, स्वास्थ्य एवं पेयजल जैसी आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किए जाने की जानकारी दी। ग्रामीण क्षेत्रों में शत-प्रतिशत स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लक्ष्य के साथ प्रदेश आगे बढ़ रहा है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि कृषि क्षेत्र में नर्मदा एवं चंबल नदियों के जल का उपयोग कर सिंचित क्षेत्र को 55 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि पूर्वजों के ज्ञान के आधार पर, अपने पुरुषार्थ और परिश्रम से स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत ऊर्जा एवं खाद्यान्न के क्षेत्र में न केवल आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि अन्य देशों की पूर्ति करने में भी सामर्थ्यवान बनेगा। मंत्री श्री परमार ने विद्यार्थियों से आत्मनिर्भर, सशक्त और वैभवशाली भारत के निर्माण के संकल्प में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। मंत्री श्री परमार ने विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने की। कुलगुरु श्री तिवारी ने कहा कि विश्वविद्यालय की 35 वर्षों की यात्रा में 62 लाख से अधिक विद्यार्थी उत्तीर्ण होकर देश-विदेश के प्रमुख मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता, सुदृढ़ परीक्षा प्रबंधन और नवाचारपूर्ण पाठ्यक्रमों के लिए पहचाना जाता है।
कुलगुरु ने बताया कि आगामी जुलाई सत्र से डिजिटल मार्केटिंग एवं फाइनेंशियल अकाउंटिंग के दो नए पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे, जिनमें एआई टूल्स, टैली तथा मीडिया की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यवस्तु को शामिल किया जाएगा। उन्होंने पीजीडीसीए एवं डीसीए पाठ्यक्रमों को रोजगार में वरीयता देने तथा संबद्ध अध्ययन संस्थाओं के छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करने का सुझाव भी रखा।
विश्वविद्यालय से सम्बद्ध अध्ययन संस्थाओं के निदेशक डॉ. आशीष जोशी ने कहा कि विश्वविद्यालय की 1 हजार 633 संस्थाएं प्रदेश भर में आईटी एवं मीडिया शिक्षा के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर कार्य कर रही हैं और यह प्रशिक्षण उनके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
नोडल अधिकारी एवं सहायक कुलसचिव श्री गिरीश जोशी ने कहा कि संस्थानों द्वारा प्रस्तुत किए गए डेटा के आधार पर ही शासन की योजनाएं बनती हैं, इसलिए AISHE पोर्टल पर सटीक और प्रामाणिक जानकारी भरना अत्यंत आवश्यक है।
देश में उच्च शिक्षा की स्थिति को दर्शाने के लिए, शिक्षा मंत्रालय (भारत सरकार) 2010-11 से हर साल वेब आधारित अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) आयोजित कर रहा है। यह सर्वेक्षण, देश के उन सभी संस्थानों को सम्मिलित करता है जो उच्च शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इसमें शिक्षकों, छात्रों के नामांकन, कार्यक्रमों, परीक्षा परिणामों, शिक्षा वित्त, बुनियादी ढांचे जैसे कई मापदंडों पर डेटा एकत्र किया जाता है। शिक्षा विकास के संकेतक जैसे संस्थान घनत्व, सकल नामांकन अनुपात, विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात, लैंगिक समानता सूचकांक, प्रति विद्यार्थी व्यय आदि की गणना भी AISHE के माध्यम से एकत्रित आंकड़ों से की जाएगी। ये आंकड़े शिक्षा क्षेत्र के विकास के लिए उपयुक्त नीतिगत निर्णय और अनुसंधान करने में सहायक होते हैं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम का आयोजन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय एवं मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
विश्वविद्यालय की कुलसचिव प्रो. पी. शशिकला ने आभार व्यक्त किया तथा कार्यक्रम का संचालन सहायक कुलसचिव श्री विवेक सावरीकर ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक श्री राजेश पाठक सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारीगण एवं विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्थानों के प्रतिनिधिगण एवं अन्य विद्वतजन उपस्थित रहे।
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