भारत और इंडोनेशिया ने आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की
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भारत और इंडोनेशिया ने सभी तरह के आतंकवाद की कड़ी निंदा की है। दोनों देशो ने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार आतंकवाद से निपटने के लिए निर्णायक और समन्वित प्रयासों का आह्वान किया है। जकार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबावो सुबियांतो के बीच द्विपक्षीय वार्ता के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में, दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति के अंतर्गत नामित आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों सहित विश्व स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया। दोनों नेताओं ने आतंकवाद और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले हिंसक उग्रवाद की रोकथाम और इसका मुकाबला करने में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति व्यक्त की। इसमें आतंकवाद के वित्तपोषण पर अंकुश लगाने, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन शोधन विरोधी और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने वाले मानकों के कार्यान्वयन को मजबूत करने, आतंकवादी समूहों द्वारा उभरती प्रौद्योगिकियों के दुरुपयोग को रोकने और डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से नफरत फैलाने से निपटने के उपाय शामिल हैं। आतंकवाद के प्रति कडी नीति की पुष्टि करते हुए, दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र और वित्तीय कार्रवाई कार्य बल सहित द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ाने का संकल्प लिया। आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के बीच संबंधों को रेखांकित करते हुए, भारत और इंडोनेशिया ने अपने घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुसार सूचना साझा करने और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने आतंकवाद विरोधी सहयोग पर समझौता ज्ञापन के शीघ्र संपन्न होने का भी स्वागत किया। इस पर जल्द ही हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। दोनों देशों ने आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराधों की रोकथाम, साइबर सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों, रक्षा उद्योग, समुद्री सुरक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए तीसरे भारत-इंडोनेशिया सुरक्षा संवाद का स्वागत किया।
दोनों नेताओं ने विकसित भारत 2047 विजन और इंडोनेशिया के इंडोनेशिया एमास 2045 एजेंडा के बीच समानताओं का भी उल्लेख किया। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि गहन आर्थिक एकीकरण से व्यापार और निवेश के अधिक अवसर खुलेंगे। दोनों पक्षों ने संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी, आसियान-भारत व्यापार समझौते की समीक्षा को समय पर पूरा करने का भी आह्वान किया। उन्होंने व्यापार और निवेश पर दूसरे कार्य समूह, चौथे द्विवार्षिक व्यापार मंत्रियों के मंच और 2026 में पहले संयुक्त आर्थिक और वित्तीय संवाद सहित मौजूदा द्विपक्षीय आर्थिक तंत्रों को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति सुबियांतो को भारत आने का निमंत्रण भी दिया।
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