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इसरो और परमाणु ऊर्जा विभाग मिलकर लूनर लैंडर के लिए उन्नत कृत्रिम तापन प्रणाली विकसित करेंगे

इसरो और परमाणु ऊर्जा विभाग मिलकर लूनर लैंडर के लिए उन्नत कृत्रिम तापन प्रणाली विकसित करेंगे
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान- इसरो ने लूनर लैंडर को चन्‍द्रमा पर कड़ाके की ठंड से बचाने के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग के साथ मिलकर उन्‍नत कृत्रिम तापन प्रणाली विकसित करेगा। इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने बंगलुरू में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद तथा स्‍टॉर्टअप उद्यमिता सम्‍मेलन में कहा कि सौर ऊर्जा से संचालित चन्‍द्रयान-3 का विक्रम लैंडर चन्‍द्रमा पर केवल 14 दिन कार्यरत रहा। अब इसरो परमाणु ऊर्जा विभाग के साथ ऐसा लैंडर तैयार करने पर काम कर रहा है जो चन्‍द्रमा पर दो सौ दिन तक सक्रिय रहे। इस लैंडर में प्रतिकूल मौसम काम करने वाले कृत्रिम ही‍टर लगे होंगे।

चन्‍द्रमा पर रात और दिन लगभग 14-14 पृथ्वी दिवस के बराबर होते हैं और दिन का तापमान 121 डिग्री सेल्‍स‍ियस तक पहुंच जाता है और रात में यह 0 से 129 डिग्री सेल्सियस नीचे आ जाता है। श्री नारायणन ने बताया कि इसरो और सीएसआईआर ने तकनीकी सहयोग के 40 क्षेत्रों की पहचान की है। इनमें से 17 को पहले चरण में कार्यावन्‍यन की स्‍वीकृति म‍िल चुकी है। ऐसी ही अनुसंधान साझेदारी विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के साथ भी की जा रही है। इससे मानवयुक्‍त गगनयान मिशन के लिए औषधि तैयार करने में मदद मिलेगी। इसरो ने एक्‍सि‍योम-4 मिशन के दौरान ग्रुप कैप्टन श‍ुभांशु शुक्‍ला द्वारा किए गए सूक्ष्‍म गुरुत्‍वाकर्षण प्रयोगो के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग के साथ भी काम किया था।
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