सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को निर्देश, ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री हटाने के लिए बने राष्ट्रीय डेटाबेस
SCसुप्रीम कोर्ट का केंद्र को निर्देश, ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री हटाने के लिए बने राष्ट्रीय डेटाबेस
सर्वोच्च न्यायालय ने इंटरनेट से बाल यौन शोषण से संबंधित सामग्री का पता लगाने और उसे हटाने के लिए मजबूत तकनीकी और नियामक उपाय करने को कहा है। न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. चंद्रन की पीठ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री की पहचान करने और उसे हटाने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने का निर्देश दिया। न्यायालय ने 2024 के अपने निर्देशों के बावजूद इस सामग्री के निरंतर प्रसार पर चिंता व्यक्त की।
पीठ ने केवल तकनीकी सुरक्षा उपाय करने को अपर्याप्त बताते हुए बच्चों को जागरूक करने और इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग के लिए प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया। पीठ ने डिजिटल सुरक्षा और आयु के अनुकूल शिक्षा को मुख्य पाठ्यक्रम में शामिल करने को कहा। यह सामग्री राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद तथा राज्य परिषदों द्वारा बाल मनोवैज्ञानिकों, शिक्षकों और पालन-पोषण संबंधी विशेषज्ञों के परामर्श से विकसित की जाएगी।
केंद्र सरकार को सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा विधि और न्याय मंत्रालय के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिकी और आवश्यक दिशानिर्देश, मानक संचालन प्रक्रियाएं और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी नियमों में संशोधन तैयार करने का निर्देश दिया गया है। सरकार को 10 दिसंबर, 2026 को अगली सुनवाई तक अपने कार्यान्वयन की प्रगति का ब्यौरा देते हुए एक शपथपत्र दाखिल करना होगा।
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