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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया मनरेगा का नाम बदलने के फैसले का बचाव किया

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया मनरेगा का नाम बदलने के फैसले का बचाव किया
shivrajsinghchouhanकेंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया मनरेगा का नाम बदलने के फैसले का बचाव किया
ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मनरेगा का नाम बदलकर विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)-विकसित भारत जी-राम जी करने के फैसले का बचाव किया है।

राज्यसभा में आज ग्रामीण विकास मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा का जवाब देते हुए श्री चौहान ने कहा कि एन.डी.ए. सरकार ने इस योजना को यू.पी.ए. सरकार की तुलना में कहीं बेहतर ढंग से लागू किया है।

उन्होंने कहा कि यू.पी.ए. सरकार ने वर्ष 2006-07 से 2014 तक इस योजना पर 2 लाख 12 हजार 409 करोड़ रुपये खर्च किए थे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व वाली एन.डी.ए.सरकार ने इसके लिए 8 लाख 58 हजार 346 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। श्री चौहान ने कहा कि ग्रामीण रोजगार अधिनियम का नाम बदलने को लेकर विपक्ष राजनीति कर रहा है।

उन्होंने कहा कि यू.पी.ए. सरकार ने जवाहर रोजगार योजना का नाम बदलकर नरेगा किया और बाद में इसमें महात्मा गांधी का नाम जोड़ दिया गया। श्री चौहान ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल मे देश में गरीबी कम हुई है। उन्‍होंने कहा कि सरकार ‘सबका साथ सबका विकास’ के आदर्श वाक्य पर काम कर रही है।

श्री चौहान ने बताया कि केंद्रीय बजट में विकसित भारत जी-राम जी के तहत 95 हजार 692 करोड़ रुपये से अधिक राशि का आवंटन किया गया है। उन्होंने कहा कि झारखंड, केरलम, पंजाब और हिमाचल प्रदेश जैसे गैर-भाजपा शासित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भी अपने बजट में इस योजना के लिए प्रावधान किया है।

श्री चौहान ने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के मकान और परिवारों को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए काम किया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अब स्वच्छ पेयजल के लिए मीलों पैदल नहीं चलना पड़ता। केंद्रीय मंत्री ने यूपीए सरकार पर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के प्रति उदासीनता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में 10 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए हैं।

ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना में संशोधन किया गया है ताकि 15 हजार रुपये से अधिक आय और दोपहिया वाहन रखने वाले लोग भी पक्के मकानों के लिए पात्र हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि ढाई एकड़ कृषि योग्य भूमि और 5 एकड़ अन्‍य प्रकार की भूमि वाले लोग भी अब आवास योजना के लिए पात्र होंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भूमि अभिलेखों का 99 प्रतिशत डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है।
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