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प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़े विधेयकों पर चर्चा के दौरान महिला भागीदारी पर दिया जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़े विधेयकों पर चर्चा के दौरान महिला भागीदारी पर दिया जोर
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प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि देश की 50 प्रतिशत आबादी को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और नीति निर्माण में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व देना समय की मांग है। श्री मोदी ने आज लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संवैधानिक संशोधन से संबंधित तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान ये बात कहीं। ये तीन विधेयक हैं- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026, परिसीमन विधेयक-2026 और केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक-2026.

प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों से इस ऐतिहासिक विधेयक को राजनीतिक रंग न देने की अपील की। उन्‍होंने कहा कि यह सभी के लिए और देश के लोकतंत्र के लिए लाभकारी होगा। श्री मोदी ने कहा कि इस विधेयक का विरोध करने वालों को भविष्य में इसके परिणाम भुगतने होंगे। उन्‍होंने कहा कि यह विधेयक देश की दिशा और भविष्य तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक विकसित भारत केवल बुनियादी ढांचे, रेलवे या आर्थिक संकेतकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें महिलाओं की समान भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार नीति निर्माण में ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना के साथ काम कर रही है।

चर्चा में भाग लेते हुए समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है। उन्होंने इतने महत्वपूर्ण विधेयक को जल्दबाजी में लाने पर सवाल उठाया। श्री यादव ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक नवीनतम जनगणना पूरी होने के बाद ही पेश किया जाना चाहिए। तेलुगु देशम पार्टी की नेता डॉ. बायरेड्डी शबरी ने कहा कि आज महिलाएं राष्ट्रीय स्तर तक देश का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने शासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से लाए गए इस महत्वपूर्ण विधेयक के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया।

इससे पहले दिन में विधि और न्‍याय मंत्री अर्जुन मेघवाल ने लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026 और परिसीमन विधेयक-2026 पेश किया। गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक-2026 पेश किया।

विधेयकों को पेश करते हुए श्री मेघवाल ने इस दिन को ऐतिहासिक बताया और कहा कि सरकार महिलाओं को राजनीतिक न्याय दिलाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026, महिलाओं के लिए समानता सुनिश्चित करेगा। डॉ. बी.आर. आम्‍बेडकर का हवाला देते हुए मेघवाल ने कहा कि किसी समुदाय की प्रगति का आकलन महिलाओं द्वारा हासिल की गई प्रगति के स्तर से किया जाता है। विधि और न्‍याय मंत्री ने कहा कि देश भर में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का एक समान और कानूनी रूप से सुसंगत वितरण लागू करने के लिए लोकसभा में सीटों की कुल संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि करना आवश्यक होगा। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही लोकसभा सदस्‍यों की संख्या 815 हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जो मौजूदा आवंटन के अतिरिक्त हैं।

श्री मेघवाल ने कहा कि जनगणना-2027 के परिणाम वर्ष 2028 की शुरुआत से पहले आने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने बताया कि इसलिए, क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्व्यवस्थापन या विभाजन तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों के आवंटन के लिए 2011 की जनगणना का उपयोग किया जाएगा।

चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन इसे सरल बनाया जाना चाहिए और परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरक्षण लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण को लागू करने में अनावश्यक देरी कर रही है और सरकार से इसे तुरंत लागू करने का आग्रह किया।

भाजपा के तेजस्वी सूर्या ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है क्योंकि देश की महिलाएं लगभग चार दशकों से इसका इंतजार कर रही थीं। उन्होंने कहा कि पहली बार देश की नारी शक्ति को राष्ट्र निर्माण प्रक्रिया में मुखर, प्रत्यक्ष, विश्वसनीय और ठोस प्रतिनिधित्व मिलेगा।
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