(todayindia) अंतर्राष्ट्रीय वन मेले में 36 लाख से अधिक मूल्य की जड़ी-बूटियों एवं हर्बल उत्पादों की बिक्री

(todayindia)अंतर्राष्ट्रीय वन मेले में 36 लाख से अधिक मूल्य की जड़ी-बूटियों एवं हर्बल उत्पादों की बिक्री | अकाष्ठीय वनोपज का उत्तरदायी प्रबंधन कार्यशाला सम्पन्न
अंतर्राष्ट्रीय वन मेले में चौथे दिन सुबह से ही शहर एवं आस-पास के सभी वर्ग के लोगों का भारी संख्या में आगमन प्रारम्भ हो गया। कल रविवार 22 दिसम्बर 2019 को अंतर्राष्ट्रीय वन मेला का समापन होगा।(todayindia)मेला समापन की अवधि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, लोगों द्वारा इसमें मिलने वाले हर्बल उत्पादों एवं वनौषधियों की खरीदी बढ़-चढ़कर हो रही है। मेले में अब तक लगभग 36 लाख के वन एवं हर्बल उत्पादों से निर्मित औषधियों की बिक्री हो चुकी है। मेले में स्थापित 32 ओ.पी.डी. में भारी तादाद में नगर एवं आसपास के क्षेत्र के आगंतुकों द्वारा निःशुल्क चिकित्सकीय परामर्श लिया जा रहा है। यह निःशुल्क ओ.पी.डी. कल समापन तक जारी रहेगी।

मेला प्रांगण में दिनांक 20.12.2019 को अकाष्ठीय वनोपज का उत्तरदायी प्रबंधनः पहुंच एवं हितलाभ साझाकरण विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के समापन सत्र में श्री ए.के. श्रीवास्तव, डायरेक्टर जनरल, एन.सी.सी.आर., डॉ. मनीष पाण्डेय, डायरेक्टर, क्वालिटी कंट्रोल ऑफ इंडिया द्वारा अकाष्ठीय वनोपजों के प्रमाणीकरण एवं उसकी प्रक्रिया तथा उसके लाभ विषय पर विस्तार से प्रस्तुतिकरण किया गया। कार्यक्रम में डॉ. राम प्रसाद सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, प्रबंध संचालक, लघु वनोपज संघ श्री एस. के. मंडल, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, एम.एफ.पी. पार्क श्री लाल सिंह रावत एवं अपर प्रबंध संचालक श्री भागवत सिंह, श्री एच.यू. खान, श्री पुरुषोतम धीमान उपस्थित रहे। कार्यशाला के अंत में श्री लाल सिंह रावत, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, एम.एफ.पी.पार्क, लघु वनोपज संघ ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

वन मेले में आज अपरान्ह में परम्परागत जड़ी बूटियों के जानकार, वैद्य, आयुर्वेदाचार्यों का सम्मेलन प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। इसमें जैव-विविधता बोर्ड से डॉ. एलिज़ा थॉमस, डॉ. वकुल लाड, अपर प्रबंध संचालक, श्री भागवत सिंह उपस्थित रहे। इस बैठक में जैव विविधता समितियों की स्थापना, जैव विविधता का संरक्षण, संवर्धन विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। वैद्य एवं आयुर्वेदाचार्यों द्वारा इस जैव-विविधता संरक्षण एवं परम्परागत ज्ञान के विकास एवं विस्तार पर विस्तृत प्रकाश डाला गया।

वन मेला प्रांगण में आज आयोजित कार्यक्रमों में फैन्सी ड्रेस एंड सोलो एक्टिंग प्रतियोगिता, लोक-नृत्य (झाबुआ), कठपुतली नृत्य, रूपेश लाल का गजल गायन और अंत में रात्रि में श्री अशोक चक्रधर की अध्यक्षता में कवि सम्मेलन हुआ। मेले में उपस्थित आगंतुकों ने इन रंगारंग कार्यक्रमों का भरपूर आनंद लिया।

रविवार 22 दिसम्बर को समापन

अंतर्राष्ट्रीय वन मेला का समापन रविवार 22 दिसम्बर को होगा। समापन समारोह राज्यपाल श्री लालजी टंडन के मुख्य आतिथ्य में होगा। वन मंत्री श्री उमंग सिंघार समापन समारोह की अध्यक्षता करेंगे। राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र गिरि गोस्वामी इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि होंगे।

समापन समारोह में मेले में स्टॉलों की साज-सज्जा एवं प्रस्तुतीकरण के लिये स्टॉल धारकों को पुरस्कृत भी किया जायेगा। समापन दिवस पर निःशुल्क चिकित्सा शिविर सुबह 11 से दोपहर 1.30 बजे तक तथा अपरान्ह में 4 से 7 बजे तक रहेगा।
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