सेना का सबसे बड़ा शस्त्र उसका मनोबल

शहीदों के माता-पिता को मिलेगी आजीवन पाँच हजार रूपये प्रतिमाह सम्मान निधि : मुख्यमंत्री श्री चौहान
भारत में शौर्य की कोई कमी नहीं – मनोहर पर्रीकर
भोपाल : शुक्रवार, अक्टूबर 14, 2016
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि सेना का सबसे बड़ा शस्त्र उसका मनोबल होता है। यह मनोबल शस्त्रों से नहीं बल्कि सवा सौ करोड़ देशवासियों के उनके पीछे खड़े होने से आता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी आज यहाँ शौर्य स्मारक के लोकार्पण के अवसर पर आयोजित शौर्य सम्मान सभा को संबोधित कर रहे थे।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि हमारी सेना बोलती नहीं पराक्रम करती है। हमारी सेना मानवता की बड़ी मिसाल है। बद्रीनाथ, केदारनाथ और श्रीनगर की बाढ़ का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि जब कभी भी प्राकृतिक आपदा आती है तो सेना लोगों की जिन्दगी बचाने का काम करती है। उस वक्त सेना यह नहीं सोचती कि यह लोग कौन है। पूरे विश्व के सुरक्षा बलों में अनुशासन, आचरण तथा सामान्य नागरिकों के प्रति व्यवहार के मानकों में भारत की सेना प्रथम पंक्ति में आती है। विश्व में शांति रक्षक बलों में सबसे ज्यादा योगदान करने वाला देश भारत है। हमारी सेना के जवानों ने अपने आचरण और व्यवहार से विश्व को जीतने में सफलता पायी है। यमन में जब देश के हजारों नागरिक फँसे थे तब सेना के जवान पाँच हजार से ज्यादा नागरिकों को देश में सही सलामत लेकर आयें। वे दूसरे देशों के नागरिकों को भी बचा कर लाये थे। यह भारत की सेना के सातत्य रूपों में से एक है। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान का इतिहास रहा है कि हमारे पूर्वजों ने कभी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया है। लेकिन जीवन मूल्यों के लिये लड़ाई में हमारी सेना कभी पीछे नहीं रही। प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध से सीधे हमारा कोई लेना-देना नहीं था फिर भी हमारे देश के डेढ़ लाख जवानों ने अपना जीवन बलिदान किया। इसे पूरे विश्व को लगातार स्मरण करवाने की आवश्यकता है। हमारे यहाँ महान परम्परा रही है कि वीर सैनिक मानवता के लिये जीते हैं और मरते हैं।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि आज हम हमारी सेना पर गर्व कर सकते हैं। हमारी सेना को तब खुशी मिलती है जब हम चैन की नींद सोते हैं। परंतु कभी-कभी हम जागने के वक्त भी सो जाते हैं। हमें जागने के वक्त तो जागना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने शौर्य स्‍मारक का निर्माण कर अभिनंदनीय कार्य किया है। शौर्य स्मारक तीर्थ-क्षेत्र है। यह हम सबके लिये और आने वाली पीढ़ियों के लिये प्रेरणा का मंदिर है। यहाँ हम अनुभव कर सकते हैं कि सेना क्या है और इसका जीवन क्या है ? सैनिकों का जीवन और कार्य हमें देश के लिये कुछ करने की प्रेरणा देता है।

श्री मोदी ने कहा कि सैनिकों की कई दशकों की माँग थी वन रैंक-वन पेंशन, जिसे हमारी सरकार ने पूरा किया है। हमने इसका भुगतान चार किश्त में देना तय किया है। अब तक साढ़े पाँच हजार करोड़ रूपये पूर्व सैनिकों के खातों में पहुँच चुके हैं। इसके लागू होने के बाद पूर्व सैनिकों को मिलने वाली राशि में 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। हमने तय किया है कि पूर्व सैनिकों को वन रैंक-वन पेंशन मिलने के बाद उसी के आधार पर सातवाँ वेतन दिया जाये। पूर्व सैनिकों की समस्याओं के तेजी से निराकरण के प्रयास किये गये हैं। हर वर्ष 50 हजार निवृत्तमान सैनिकों को रोजगार दिया जा रहा है। फौज से सेवानिवृत्त होने वाले सैनिकों को सेवानिवृत्ति के एक वर्ष पहले कौशल प्रशिक्षण देकर उसका सर्टिफिकेट देने की व्यवस्था लागू की है। निवृत्तमान सैनिकों की मदद के लिये रक्षा मंत्री विवेकाधीन राशि से पहले हर वर्ष औसत 10 से 12 हजार सैनिक परिवार को मदद की जाती थी। अब हर वर्ष इस राशि से 50 हजार सैनिक परिवारों को सहायता की जा रही है। हवलदार तक के पद से निवृत्त होने वाले सैनिकों की बेटी की शादी में दी जाने वाली सहायता राशि 16 हजार से बढ़ाकर अब 50 हजार रूपये कर दी गई है। नि:शक्त सैनिकों को अस्पताल से प्रमाण-पत्र लेने में होने वाली दिक्कतों को दूर किया गया है। सेना से निवृत्त सैनिकों की चिकित्सीय मदद के लिये देश में 472 नये अस्पतालों को अधिकृत किया गया है। इनमें 64 मध्यप्रदेश के हैं। रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भारत आत्म-निर्भर बने, इसके प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के देशों में सार्वजनिक स्थानों पर सैनिकों को देखकर उन्हें सम्मान करने की परम्परा है। हमारे देश में भी नागरिक सार्वजनिक स्थानों पर सैनिकों को देखकर उनका आदर करने की परम्परा बनायें। प्रधानमंत्री ने कहा कि भोपाल का शौर्य स्मारक आने वाली पीढ़ियों को संस्कारित करने वाला संस्थान बनेगा।

भारत में शौर्य की कोई कमी नहीं – श्री मनोहर पर्रिकर

केन्द्रीय रक्षा मंत्री श्री मनोहर पर्रिकर ने राज्य सरकार को शौर्य स्मारक की स्थापना करने पर बधाई देते हुए कहा कि भारत में शौर्य की कोई कमी नहीं है। उन्होंने शिवाजी और राणा प्रताप का संदर्भ देते हुए कहा कि भारत में पराक्रम की कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1965 और 1971 में भारत के सैनिकों की वीरता का प्रदर्शन पूरी दुनिया ने देखा है। कई शहीद मध्यप्रदेश की धरती के लाल थे। उन्होंने मध्यप्रदेश के नागरिकों को और सरकार को बधाई दी। श्री पर्रिकर ने कहा कि शौर्य स्मारक ऐसे समय लोकार्पित हो रहा है जब हाल में भारत के जवानों ने अपनी वीरता साबित की है।

शहीदों के माता-पिता को मिलेगी आजीवन पाँच हजार रूपये प्रतिमाह सम्मान निधि

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने शहीदों के माता-पिता को आजीवन पाँच हजार रूपये प्रतिमाह सम्मान निधि देने की घोषणा की। उन्होने पूर्व सैनिकों के लिये आर्मी वेल्‍फेयर हाउसिंग एसोसिएशन को भोपाल या जहाँ सुविधाजनक हो, आवास के लिये जमीन दी जायेगी। नेशनल डिफेंस अकादमी और नेशनल मिलिटरी अकादमी में प्रवेश के लिये राज्य के युवाओं को विशेष प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जायेगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी भारत को शक्तिशाली देश बनाने के लिये संकल्पित हैं। उन्होने कहा कि शौर्य सम्मान सभा सामान्य अवसर नहीं है। यह शहीदों को नमन करने का अवसर है। शहीदों की वीरता को नमन करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि जब भी नापाक कदम भारत भूमि पर पड़े, सेना ने उन्हें विफल कर दुश्मन का सीना छलनी कर दिया। उन्होंने कहा कि देश शहीदों का कर्जदार है जिन्होंने अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया। उन्होंने शौर्य स्मारक को वीरता का मंदिर बताते हुए कहा कि वीरों की पूजा होनी चाहिये। यह वीरों को प्रणाम करने का समय है। उन्होंने बताया कि वीर शहीदों के गाँवों की पवित्र माटी को स्मृति के रूप मे पूरे प्रदेश से एकत्र किया गया है। इसे शौर्य स्मारक में संजो कर रखा जायेगा ताकि सभी को प्रेरणा मिलती रहे।

श्री चौहान ने प्रधानमंत्री श्री मोदी को सुपर मानव बताते हुए कहा कि देश के लिये जीना सीखना है तो उनसे सीखना चाहिये। उन्होंने कहा कि देशभक्ति यही है कि मेहनत और ईमानदारी से काम करें, चाहे जिस भी पेशे में हो। अपने कर्त्तव्य पथ पर आगे बढ़े। देश के कामों के लिये समय जरूर निकालें। श्री चौहान ने कहा कि आज देश की विकास दर साढ़े सात प्रतिशत हो गई है। भारत ने चीन को विकास दर में पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया है कि हम किसी को नहीं छेडेंगे लेकिन छेडोगे तो छोडेंगे नहीं। उन्होंने उपस्थित जन-समुदाय से आग्रह किया कि वे शौर्य स्मारक देखने और शहीदों की स्मृति को नमन करने जरूर जायें।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री, राज्यपाल श्री ओमप्रकाश कोहली और रक्षा मंत्री श्री पर्रिकर को शौर्य स्मारक की प्रतिकृति भेंट की गयी।

इस अवसर पर भूतपूर्व सैनिक और प्रदेश भर से आये गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।

मंच पर केन्द्रीय ग्रामीण विकास और पंचायत राज्य मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते, राजस्व मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता, प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव, सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री विश्वास सारंग, भाजपा अध्यक्ष और सांसद श्री नन्द कुमार सिंह चौहान, सांसद श्री आलोक संजर, भोपाल महापौर श्री आलोक शर्मा उपस्थित थे। गृह मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह ने आभार व्यक्त किया।