मुस्लिम बहनों को जलालत से मुक्ति, न्यायालय ने लैंगिक समानता और उनके मौलिक अधिकारों पर मोहर लगायीः मालवीय, ऐलकर

22/08/2017
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता सुश्री राजो मालवीय और महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती लता ऐलकर ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने तीन तलाक मामलें में मुस्लिम बहनों को जलालत की जिन्दगी से मुक्ति देकर जहां एक ओर उनके हर लैंगिक समानता के अधिकार को सुरक्षित किया है वहीं उनके मौलिक अधिकारों के लिए कानूनी कवच दिया है।
उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ सामाजिक सुधारों का युग आया है। मुस्लिम बहुल देशों में भी परंपरा की आड़ में समाज को बेडियों में जकड़े रहना न्यायोचित नहीं है। इन देशों में तीन तलाक पर रोक लग चुका है। समाज सुधारको और धर्म गुरूओं का फर्ज बनता है कि वे आगे आएं ओर समाज से उन कुरीतियों को समाप्त करें जिसने अल्पसंख्यकों को समाज के विकास की मुख्यधारा में शामिल होने से बाधित किया है।
सुश्री मालवीय और श्रीमती ऐलकर ने कहा कि एक ओर तो अल्पसंख्यक भाई, बहनों को प्रगतिशील दौर से विलग रखा जा रहा है। दूसरी ओर पिछड़ेपन के लिए भाग्य को कोसा जा रहा है। अल्पसंख्यकों के तीन तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार से तीन तलाक रोकने के लिए कानून बनाने का निर्देश देकर मुस्लिम समाज की प्रगति का मार्ग खोल दिया है।