पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 95वीं जयंती पर रोहतांग दर्रे सुरंग का नाम अटल सुरंग रखा गया

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 95वीं जयंती पर रोहतांग दर्रे सुरंग का नाम अटल सुरंग रखा गया | प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज नई दिल्‍ली में अटल भू- जल योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पानी का मुद्दा अटलजी के दिल के बहुत करीब था। उन्‍होंने कहा कि इस अभियान से 2024 तक प्रत्‍येक परिवार को पानी की आपूर्ति में मदद मिलेगी।

केन्‍द्र सरकार की यह योजना पंचायतों के नेतृत्‍व में भूजल प्रबंधन को बढ़ावा देने और मांग प्रबंधन पर विशेष जोर देते हुए लोगों की आदतों में बदलाव लाने के बारे में है।

केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने कल इस योजना के लिए छह हजार करोड़ रूपये की राशि को मंजूरी दी थी। यह योजना पांच वर्ष में कुछ राज्‍यों के चुनिंदा क्षेत्रों में लागू की जाएगी। ये राज्‍य हैं–गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्‍यप्रदेश, महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान और उत्‍तरप्रदेश।

इस अवसर पर श्री मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 95वीं जयंती के उपलक्ष्‍य में हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रे के नीचे बनाई जा रही सुरंग को अटल सुरंग नाम दिया। अटल जी ने यह सुरंग बनाने का ऐतिहासिक फैसला जून दो हजार में में लिया था। मई 2002 में इसकी आधारशिला रखी गई थी। मंत्रिमंडल ने इसके लिए चार हजार करोड़ रूपये स्‍वीकृत किए थे।

आठ दशमलव आठ किलोमीटर लम्‍बी यह सुरंग बनने से मनाली और लेह के बीच की दूरी 46 किलोमीटर तक कम हो जायेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि महत्‍वपूर्ण अटल टनल इस क्षेत्र का भाग्‍य बदल देगी और इससे यहां पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

इस अवसर पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि टनल का नाम पूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर रखा गया है और यह उन्‍हें एक श्रद्धांजलि है, जिन्‍होंने इस टनल के निर्माण का ऐतिहासिक फैसला किया था। उन्‍होंने कहा कि टनल के पूरा हो जाने के बाद सभी मौसम में लाहौल स्पिति के सुदूर क्षेत्रों में आवागमन संभव हो सकेगा। इससे मनाली और लेह के बीच की दूरी 46 किलोमीटर कम हो जाएगी।

श्री सिंह ने कहा कि भूमि जल के स्रोतों का दोहन किया गया है, लेकिन इसे बचाने के लिए कुछ नहीं किया गया है।

जल शक्ति मंत्री गजेन्‍द्र सिंह शेखावत ने कहा कि जल प्रबंधन समय की जरूरत है, क्‍योंकि देश के विभिन्‍न क्षेत्रों में भूजल का स्‍तर नीचे गिरता जा रहा है। उन्‍होंने जल संरक्षण को जन आंदोलन में बदलने की आवश्‍यकता पर जोर दिया।
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