नर्मदा किनारे के ऐतिहासिक घाटों और प्रागैतिहासिक गुफाओं का संरक्षण जरूरी

 

भोपाल : बुधवार, दिसम्बर 14, 2016
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को आज यहाँ उज्जैन जिले के महिदपुर किले के अनुरक्षण कार्य के लिये यूनेस्को द्वारा दिया गया एशिया पेसिफिक हेरिटेज अवार्ड’ भेंट किया गया। मुख्यमंत्री ने संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग को इस सराहनीय पहल और अवार्ड के लिये बधाई दी। इस अवसर पर संस्कृति राज्य मंत्री श्री सुरेन्द्र पटवा, प्रमुख सचिव संस्कृति श्री मनोज श्रीवास्तव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री एस.के.मिश्रा, आयुक्त पुरातत्व श्री अनुपम राजन एवं यूनेस्को के प्रतिनिधि सुश्री मोए चिबा, विश्व स्मारक कोष न्यूयार्क की प्रतिनिधि सुश्री गुरमीत एस राय और संरक्षण वास्तुविद सुश्री ऐश्वर्या टिपनिस उपस्थित थे।

यूनेस्को द्वारा वर्ष 2000 से यह अवार्ड शुरू किया गया है। मध्यप्रदेश को यह अवार्ड पहली बार मिला है।

मुख्यमंत्री ने यूनेस्को के प्रतिनिधि-मंडल को हाल में नर्मदा नदी के संरक्षण के लिये प्रारंभ की गई नर्मदा सेवा यात्रा की जानकारी देते हुए बताया कि नर्मदा के किनारे ऐतिहासिक महत्व के घाट और प्रागैतिहासिक गुफाएँ हैं। इनके संरक्षण की पहल करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसकी सूची बनाकर संरक्षण की कार्य-योजना बनाई जायेगी। विशेष रूप से घाटों के संरक्षण का काम प्राथमिकता से शुरू किया जायेगा।

उल्लेखनीय है कि यह प्रतिष्ठित अवार्ड उज्जैन जिले के महिदपुर किले के अनुरक्षण कार्य के लिये यूनेस्को द्वारा दिया गया है। अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण विशेषज्ञों की समिति द्वारा बैंकाक में इस अवार्ड के लिए प्राप्त 40 प्रविष्टि में से 13 देशों की प्रविष्टियाँ अवार्ड के लिये चुनी गई। महिदपुर किले के अनुरक्षण कार्य की प्रविष्टि अवार्ड के लिये चयनित प्रविष्टियों में से एक रही। इसके अलावा 12 प्रविष्टियाँ ईरान, चाइना, जापान, पाकिस्तान और आस्ट्रेलिया की रही। प्रदेश में 492 राज्य संरक्षित स्मारक का अनुरक्षण एवं विकास कार्य स्मारक की वास्तु-कला तथा अन्य विशेषताओं को देखते हुए सावधानी से किया जा रहा है।

क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित महिदपुर किले का अनुरक्षण संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय और वर्ल्ड मान्यूमेंट फण्ड की सहभागिता से किया गया है। महिदपुर किले की सुरक्षा प्राचीर, बुर्ज, प्रवेश द्वार एवं कंगूरों का अनुरक्षण किया गया है। इसका निर्माण 18 वीं शताब्दी में करवाया गया था। यह होल्कर राज्य इंदौर का एक भाग था। सन 1817 में यहाँ पर अंग्रेजों और होल्कर राज्य के बीच युद्ध हुआ था।