त्रिवेणी संगम की तरह पवित्र है डी.बी.टी. योजना: डॉ. रमन सिंह : मुख्यमंत्री ने किया प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण पर कार्यशाला का शुभारंभ

रायपुर 06 सितम्बर 2016
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज यहां प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डी.बी.टी.) योजना की एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा – डी.बी.टी. को त्रिवेणी संगम जैसी पवित्र योजना है। जिस प्रकार नदियों के पवित्र त्रिवेणी संगम में स्नान करने पर पुण्य लाभ मिलता है, ठीक उसी तरह प्रधानमंत्री की जन-धन योजना, आधार कार्ड परियोजना और मोबाईल फोन पर आधारित केन्द्र सरकार के इस महत्वपूर्ण प्रकल्प में शामिल होकर नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकता है। इन योजनाओं की अनुदान राशि उनके आधार कार्ड नम्बरों के जरिए हितग्राहियों के बैंक खातों में कम से कम समय में सीधे हस्तांतरित हो सकती है। इससे अनुदान वितरण में और भी ज्यादा पारदर्शिता आएगी। अनियमितता की आशंकाए भी नहीं रह जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा – जनधन, आधार और मोबाइल तीनों को मिलाकर इस परियोजना को संक्षेप में ’जेम’ भी कहा जाता है। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डी.बी.टी.) दुनिया में अपनी तरह की सबसे बड़ी परियोजना है, जिसका संचालन भारत सरकार द्वारा किया जा रहा है। केन्द्र और राज्य सरकारों की विभिन्न योजनाओं को शामिल कर डी.बी.टी. का और भी ज्यादा विस्तार किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य में इस महीने की 30 तारीख तक डी.बी.टी. प्रकोष्ठ का गठन करने का लक्ष्य है, ताकि उसके जरिये नागरिकों को एक सुगम और विश्वसनीय डिजिटल प्लेटफार्म मिल सके। मुख्यमंत्री ने इस बात पर खुशी जतायी की राज्य में 90 प्रतिशत लोगों के आधार पंजीयन का काम पूरा हो चुका है। डी.बी.टी. के संचालन के लिए शत-प्रतिशत आधार पंजीयन और सभी परिवारों के बैंक खाते खोलने का लक्ष्य है। साथ ही सभी ग्राम पंचायतों में बैंक खोलने का भी प्रयास किया जा रहा है। राज्य सरकार ने प्रदेश की समस्त लगभग 11 हजार ग्राम पंचायतों में लोक सेवा केन्द्र खोलने का काम भी शुरू कर दिया है। प्रदेश के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में आंगनबाड़ी केन्द्रों की राशि, तेन्दूपत्ता पारिश्रमिक और छात्रवृत्ति राशि का भुगतान डी.बी.टी. प्रणाली के जरिये सफलतापूर्वक किया जा रहा है। कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को मुख्य सचिव श्री विवेक ढांड, सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक विभाग के प्रमुख सचिव श्री अमन कुमार सिंह ने भी सम्बोधित किया। मुख्य सचिव श्री ढांड ने कहा कि मार्च 2017 तक राज्य की सभी हितग्राही मूलक योजनाओं को डी.बी.टी. में शामिल करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से इसके लिए सभी संबंधित विभागों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
प्रदेश सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव श्री अमन कुमार सिंह ने कहा – प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) प्रणाली नागरिको के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सूचना और संचार टेक्नालॉजी के जरिए सरकारी कार्य प्रणाली में और भी ज्यादा पारदर्शिता लाना तथा डीबीटी का एक रोडमैप तैयार करना है। भारत सरकार के डीबीटी मिशन के संयुक्त सचिव श्री पीयूष कुमार, डिजिटल वित्तीय समावेशन संस्थान के कार्यकारी निदेशक श्री कृष्णन धर्मराजन सहित कई विषय विशेषज्ञों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यशाला में आंध्रप्रदेश की ई-प्रगति, मध्यप्रदेश के ’समग्र’ और राजस्थान की ’भामाशाह’ योजना पर भी विचार मंथन किया गया। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) को ग्रामीण विकास, खाद्य और नागरिक आपूर्ति, समाज कल्याण, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और वित्तीय सेवाओं से जुड़े विभागों में लागू करने के बारे में भी कार्यशाला में चर्चा की गई।
उल्लेखनीय है कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) योजना पूरे देश में एक जनवरी 2015 से तकनीकी रूप से लागू हो गई है। इसकी शुरुआत रसोई गैस सब्सिडी के प्रत्यक्ष हस्तांतरण द्वारा की गई है, जो ग्राहक के आधार संख्या से जुड़े बैंक खातों में जा रही है। डीबीटी जरूरतमंद लोगों तक सीधे सरकारी सब्सिडी पहुंचाने की महत्वपूर्ण योजना है। इससे समाज कल्याण कार्यक्रमों और वितरण प्रणाली में सकारात्मक परिवर्तन होगा। राज्य के कुछ जिलों में छात्रवृति आदि का डीबीटी के अन्तर्गत सफलतापूर्वक हस्तांतरण किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में पेंशन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, तेंदूपत्ता पारिश्रमिक भुगतान को भी डीबीटी के तहत लाने का प्रयास किया जा रहा है।