उपराष्ट्रपति ने 22 भारतीय भाषाओं में बोल कर सभी को चकित किया

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उपराष्ट्रपति ने 22 भारतीय भाषाओं में बोल कर सभी को चकित किया
उपराष्ट्रपति ने नागरिकों से मातृभाषा को प्रोत्साहित करने की शपथ लेने और अन्य भाषाएं सीखने का आह्वान किया | उपराष्ट्रपति ने प्रशासन में स्थानीय भाषा के इस्तेमाल पर जोर दिया |
मातृ भाषा का उत्सव एक दिन का पर्व नहीं : उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति ने मातृ भाषा के महत्ता पर महात्मा गांधी और सरदार पटेल के विचारों को उद्धृत किया
उपराष्ट्रपति ने अंतर्राष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस समारोह को संबोधित किया
नई दिल्ली में आज आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस समारोह के अवसर पर मातृभाषा के संरक्षण और संवर्धन के महत्व को उजागर करते हुए उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने स्वयं 22 भाषाओं में बोल कर सभी को चकित कर दिया। इस अवसर पर उन्होंने नागरिकों का आह्वाहन किया कि वे मातृभाषा को प्रोत्साहित करने की शपथ लें और अन्य भाषाओं को भी सीखें।

उपराष्ट्रपति ने भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहित करने हेतु एक राष्ट्रीय आंदोलन चलाने का आह्वाहन करते हुए कहा कि जब हम मातृभाषा के संरक्षण की बात करते हैं तो हम वस्तुत: भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण और संवर्धन की भी बात करते हैं।

भारतीय भाषाओं को रोज़गार से जोड़ते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक स्तर तक के राजकीय पदों में भर्ती के लिए भारतीय भाषाओं का ज्ञान अनिवार्य होना चाहिए।

भाषा को समावेशी विकास के लिए आवश्यक बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन में स्थानीय भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हाई स्कूल तक शिक्षा का माध्यम अनिवार्यतः मातृभाषा होनी चाहिए।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने फैसलों की प्रति 6 भाषाओं में उपलब्ध कराए जाने की सराहना की और अपेक्षा की कि अधीनस्थ न्यायालय भी इस दिशा में कार्य करेंगे।

भारत की भाषाई विविधता के संरक्षण की जरूरत पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि मातृभाषा का उत्सव कोई एक दिन का पर्व नहीं होना चाहिए बल्कि लोगों को अपनी मातृभाषा को अपनी रोज़ की जीवनचर्या का अभिन्न अंग बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत में 19,500 भाषाएं या बोलियां मातृभाषा के रूप में बोली जाती हैं। ये बोलियां हमारे सनातन संस्कारों, सदियों की सभ्यता में विकसित ज्ञान और अनुभव की साक्षी हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वैज्ञानिक संरचना, उच्चारण, सरल लिपि और सहज व्याकरण भारतीय भाषाओं की पहचान रही हैं जिनमें प्राचीन, मध्य कालीन और आधुनिक काल में महान साहित्यिक कृतियों की रचना की गई।(todayindia),Headlines,Latest News,Breaking News,Cricket ,Bollywood news,today india news,today india
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